तुझ पे ही दिल आता है तुझ से ही दिल रूठता है

 


तुझ पे ही दिल आता है तुझ से ही दिल रूठता है

क्या सही है क्या ग़लत ये बस आइना बताता है 

तेरी लफ़्ज़ों को इसलिए भी अनदेखा करते हैं क्योंकि 

तेरे होंठ तो तेरे हैं मगर ये दिल तुझ से मोहब्बत करता है

मैं और लड़कों की तरह लड़कियों से दोस्ती नहीं रखता 

ज़रा बतलाओ क्या तुम्हारा दिल हर किसी पर आता है 

 किसे खबर तेरे दिल पर ये खराश कैसी 

तेरा दिल मोहब्बत तो नहीं मगर आज़माना जानता है 

हम तो बर्बादी के कगार पर खड़े हैं दोस्तों

ज़रा तुम बताओ क्या खुशी के साथ ग़म भी जाता है

© आशु चौधरी "आशुतोष 

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