वो आती है तो जी चाहता है वो यहीं रहे
वो खुश रहे आबाद रहे चाहे कहीं रहे
उसके झगड़े उसके होंठ उसके गाल उसके बाल उसकी हंसी
जैसे तबीयत भी लगी रहे मौसम भी बनी रहे..
अगर किसी को रास नहीं हमारी खुशी
तो हमारी हंसी भी यारों दबी रहे
हम उसे लिखते रहें उसकी श्रंगार करते रहें
इल्तिज़ा है कि वो उम्रभर यारों हसीं रहे
© आशु चौधरी "आशुतोष

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