मैं बूंद बनकर उसके जिस्म से रूह में उतर जाऊं

 

वो बारिशों में भींगने निकले और मैं बूंद बनकर 

उसके जिस्म से रूह में उतर जाऊं

©  आशु चौधरी "आशुतोष

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