उसको सोचेंगे उसको देखेंगे हम हरे-भरे रहेंगे
हम तो पेड़ हैं ऐ जिन्दगी हमें काट दो या सँवार दो
हम जहाँ हैं वहीं रहेंगे अपनी जगह से नहीं हटेंगे
©आशु चौधरी "आशुतोष
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें