जब भी आए वो मुलाकात करने
जैसे कोई बात करने...
जब भी उठे लब उनके हमारे खिलाफ़
हम उनके लबों को बीच में रोक कर
लग गये रात करने.....
© आशु चौधरी "आशुतोष
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