दुआओं में अपने हिस्से की आधी उम्र तुम्हें देते हैं


पहले क्या हुआ हमें खुद याद नहीं

भूल से भी खाई हो ग़र 

तुम्हारी झूठी कसम

तो चलो दुआओं में अपने हिस्से की 

आधी उम्र तुम्हें देते हैं

मगर अब जो तुमसे वादा किया है

तुमने जो कसमे दी हैं 

सब याद है हमें सब याद रहेगा 

जब तक तुझ से मोहब्बत रहेगा 

तब तक रखेंगे महफूज़ तुम्हारे वादों को

नहीं हिलने देंगे अपने इरादों को

यूँ बात बात पर कसमें न दिया करो

तुम्हारी अहमियत से बड़ी कोई अहमियत नहीं

शायद तुम्हें भी मालूम नहीं तुम्हारी कीमत

पता नहीं और लोग तुम्हें कैसे पढ़ते हैं

जो जानते हैं तुम्हारी अहमियत हम जैसे पढ़ते हैं

कभी हमसे पूछो अपनी कीमत

हम तुम्हें दिन से रात तक का हिसाब देंगे

यकीन नहीं तो 

तुम खरीदारी में साथ ले चलो अपने

फिर सारे बाजार में हर शै की कीमत पूछो

फिर हमसे पूछो क्या चाहिए क्या पसंद है

हम अगर कुछ न बोलें 

तो रख देना कान हमारे सीने पर

फिर सुनना धड़कनें भी कहेंगी

शहर में कोई शै तुमसे महंगा नहीं

(शै- वस्तु)

© आशु चौधरी "आशुतोष

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