मोहब्बत है इबादत है कसम है जान है जहान है


 

    मोहब्बत है इबादत है

    कसम है जान है जहान है

    वतन है महबूब है जिस्म है

    जख्म है इंतजार है एतबार है

    बगैर इनके बगैर उनके

     जिंदगी भी विरान है

     © आशु चौधरी "आशुतोष

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें