उसके कदम पड़े थे इक रोज़ मेरे आंगन में

 


" उसके कदम पड़े थे इक रोज़ मेरे आंगन में

   फिर कभी हमने उस जगह 

   किसी और को ना रखने दिया क़दम ,,


 ©आशु चौधरी "आशुतोष

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