वो इश्क ही किया जो बताया जाए, जताया जाए,

 


वो इश्क ही क्या जो बताया जाए, जताया जाए,

जरूरी तो नहीं 

जिस्में चादर चाहतें बिस्तर पर बिछाया जाए


क्यों न इश्क को बस महसूस ही किया जाए, 

आंसु-ए-गम छुप कर ही पिया जाए


'आशु' हमारी जिंदगी तो किसी काम की नहीं

तो चलो उसकी यादों में ही दिन रात जिया जाए । 


© आशु चौधरी ''आशुतोष 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें