ना इधर के हम ना उधर के हम
जाने किधर किधर के हम
जहां तू मिला वहीं जी लिए
ज़ख्म भी सारे सी लिए
ना इधर के हम ना उधर के हम
भुला न पाएंगे तुझको मर के हम
तुझे देख कर जिंदा हो गये
मेरे कुछ शेर चुनिंदा हो गये
ना इधर के हम ना उधर के हम
सँवर न पाए सुधर के हम
हम हैं तिरे इंतजारों में
हमें न खोज अखबारों में
ना इधर के हम ना उधर के हम
अब नहीं किसी खबर में हम
मुझे याद है वो तिरा मिलना
मुझे याद है वो तिरा बिछड़ना
यूँ तिरे दिल से उतर के हम
रो पड़े थे आँख भर के हम
ना इधर के हम ना उधर के हम
जाने किधर किधर के हम
© आशु चौधरी "आशुतोष
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